Hartalika Teej 2025 — महत्व, तिथि और मुहूर्त:
- Karmic Code
- Aug 25, 2025
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हरतालिका तीज एक प्रमुख हिन्दू पर्व है, जो देवी पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन को समर्पित है। यह व्रत विशेषकर महिलाओं द्वारा उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश) और नेपाल में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।
मुख्य बातें –
कब मनाया जाता है?भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (अगस्त–सितंबर) को हरतालिका तीज मनाई जाती है।
क्यों मनाया जाता है?मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी सखियों ने उन्हें वन में ले जाकर तप करने में सहायता की। अंततः शिवजी उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उनके पति बने।
महिलाएँ क्या करती हैं?
विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
अविवाहित कन्याएँ आदर्श पति (भगवान शिव जैसे) की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं।
इस दिन शिव-पार्वती की पूजा, कथा वाचन और भजन-कीर्तन किए जाते हैं।
सांस्कृतिक महत्व:महिलाएँ सुहाग-श्रृंगार करती हैं, मेहंदी रचाती हैं, नए वस्त्र पहनती हैं और समूह में मिलकर तीज के गीत गाती हैं।
👉 संक्षेप में, हरतालिका तीज भक्ति, वैवाहिक सुख और स्त्री-शक्ति का पर्व है, जो शिव-पार्वती के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

Hartalika Teej इस वर्ष 26 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी, जो भाद्रपदा मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ती है।
तृतीया तिथि: 25 अगस्त दोपहर 12:35 बजे से शुरू होकर 26 अगस्त दोपहर 1:55 बजे तक रहेगी।
पूजा मुहूर्त:
प्रातःकाल (सुबह): 6:11 से 8:42 बजे तक
प्रदोषकाल (सायंकाल): 6:46 से अगले दिन दोपहर 1:55 बजे तक
उदय-अस्त व मीनार्ध-समय:
सूर्योदय: 6:11 बजे
सूर्यास्त: 6:46 बजे
चंद्र उदय और मूनसेट (Ujjain 기준): 8:37 बजे
पौराणिक कथा और विधियां:
Hartalika Teej का नाम ‘हरत’ (अपहरण) और ‘आलिका’ (सखी) से मिलकर बना है। कहानी के अनुसार, माता पार्वती के मित्रों ने उन्हें विंध्य पर्वत के जंगल में छुपा लिया था, ताकि शादी का निर्णय उनके पिता हिमालय द्वारा विष्णु से न हो। वहीं, शिव-लिंग की स्थापना और गहरे तप के कारण भगवान शिव प्रसन्न हुए और विवाह हुआ — यही त्योहार का आधार है।
उत्सव का महत्व और रीति-रिवाज:
विवाहित महिलाएँ इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं — पुलिस पति की दीर्घायु, खुशहाली और परिवार की समृद्धि के लिए; अविवाहित लड़कियाँ अच्छे जीवन साथी की कामना के लिए व्रत रखती हैं।
शाम को सुखी सामग्री जैसे जग्गेरी, चावल की पटोलियाँ, नारियल कढ़ी, दूधवाला हलवा, गुजिया, मालपुआ, कोकोनट लड्डू, सबूदाना खीर, पूड़ी आदि तैयार की जाती हैं।
मंदिरों में शिव और पार्वती की प्रतिमा या शिव-लिंग की पूजा होती है—फूल, बेलपत्र, धूप, दीप, मंत्र और कथा पढ़ी जाती हैं। व्रत अगले दिन पूजा के बाद ही तोड़ता है।




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