Hindu Calendar: Vedic Roots and Its Evolution
- Karmic Code
- Sep 2, 2025
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The Hindu calendar, जिसे हम पंचांग (Panchangam) भी कहते हैं, दुनिया के सबसे पुराने समय मापन प्रणालियों (timekeeping systems) में से एक है। इसकी शुरुआत वैदिक युग (Vedic Era) से हुई मानी जाती है। आज भले ही भारत में दैनिक जीवन और सरकारी कामकाज के लिए Gregorian calendar इस्तेमाल होता है, लेकिन पूजा-पाठ, त्योहार और ज्योतिषीय गणनाएँ अभी भी पारंपरिक हिंदू कैलेंडर के अनुसार ही की जाती हैं।
यह कैलेंडर सिर्फ तारीखें बताने का साधन नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान (astronomy), ज्योतिष (astrology), और हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का संगम है।

वैदिक युग और शुरुआती स्वरूप
प्राचीन वैदिक प्रणाली के अनुसार, एक वर्ष को 360 दिनों का माना गया।
इसे 12 महीनों में विभाजित किया गया था, और हर महीना चंद्रमा के चरणों (phases of the Moon) पर आधारित होता था।
प्रत्येक महीने में 27 या 28 दिन माने जाते थे, क्योंकि चंद्रमा लगभग इतने दिनों में अपने एक चक्र को पूरा करता है।

लेकिन यहां एक समस्या थी। सौर वर्ष (solar year) लगभग 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष (lunar year) केवल 354 दिनों का। इस फर्क को संतुलित करने के लिए समय-समय पर अधिक मास (leap month) या अतिरिक्त दिन जोड़े जाते थे।


ऋतु और महीने
हिंदू वर्ष को 6 ऋतुओं (Seasons) में विभाजित किया गया है, और हर ऋतु में 2 महीने होते हैं।
वसंत ऋतु – चैत्र, वैशाख
ग्रीष्म ऋतु – ज्येष्ठ, आषाढ़
वर्षा ऋतु – श्रावण, भाद्रपद
शरद ऋतु – आश्विन, कार्तिक
हेमंत ऋतु – मार्गशीर्ष, पौष
शिशिर ऋतु – माघ, फाल्गुन
वैदिक काल में महीनों के नाम अलग थे, लेकिन 4वीं शताब्दी CE तक वर्तमान में प्रचलित नामों को अपनाया गया।
यूनानी और मेसोपोटामियन प्रभाव
भारत का यूनानी (Greek) और मेसोपोटामियन सभ्यता से संपर्क होने पर हिंदू कैलेंडर में कुछ बड़े बदलाव आए।
सात दिन का सप्ताह (7-day week), जो सात खगोलीय पिंडों (Sun, Moon, और पाँच ग्रह) पर आधारित था।
12 राशियाँ (Zodiac signs), जो बाद में हिंदू ज्योतिष और पुराण कथाओं में शामिल हो गईं।
इस तरह हिंदू कैलेंडर में स्थानीय परंपराओं के साथ-साथ बाहरी खगोलीय ज्ञान भी समाहित हो गया।

आज का महत्व
आज भले ही हमारा आधिकारिक कैलेंडर ग्रेगोरियन हो, लेकिन हिंदू पंचांग का महत्व अब भी अटूट है।
त्योहारों की तिथियाँ (जैसे दिवाली, होली, नवरात्रि)
शुभ मुहूर्त (जैसे विवाह, गृह प्रवेश, पूजा)
ज्योतिषीय गणनाएँ – सब कुछ हिंदू कैलेंडर पर आधारित है।
यानी, जब भी हम कोई त्योहार मनाते हैं या किसी शुभ कार्य का समय चुनते हैं, हम वास्तव में एक ऐसी परंपरा का पालन कर रहे होते हैं जो हजारों साल पुरानी है।
निष्कर्ष
हिंदू कैलेंडर सिर्फ एक तारीख़ गिनने की प्रणाली नहीं है। यह वैदिक युग के खगोलीय ज्ञान, सांस्कृतिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं का अद्भुत मेल है।
आज भी जब हम पंचांग खोलकर किसी त्योहार या मुहूर्त की तारीख़ देखते हैं, तो याद रखना चाहिए कि यह एक साधारण तारीख़ नहीं बल्कि एक cosmic calculation है, जिसे हमारी परंपरा ने हज़ारों सालों तक संजोकर रखा है।




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