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स्वस्तिक का असली अर्थ | Spiritual Symbolism of Swastik in Hinduism, Buddhism & Jainism

स्वस्तिक का असली अर्थ जानें। इसका महत्व हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में, और क्यों यह पवित्र चिन्ह शुभता और समृद्धि का प्रतीक है।


Image alt: Swastik symbol in Hinduism meaning and significance
Image alt: Swastik symbol in Hinduism meaning and significance

स्वस्तिक – एक ऐसा प्राचीन प्रतीक जो दुनिया भर की सभ्यताओं और धर्मों में पाया गया है।जहाँ पश्चिम (West) में इसे प्रायः नाजी जर्मनी (Nazi Germany) से जोड़ा जाता है, वहीं भारत और एशिया के अन्य देशों में यह दिव्यता, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।


स्वस्तिक का अर्थ -दाएँ तरफ़, बाएँ तरफ़
स्वस्तिक का अर्थ -दाएँ तरफ़, बाएँ तरफ़

आज हम इस ब्लॉग में स्वस्तिक के मूल अर्थ, इसका आध्यात्मिक महत्व और विभिन्न संस्कृतियों में इसकी पहचान को समझने की कोशिश करेंगे। स्वस्तिक के रूप और धार्मिक महत्व

  • हिंदू धर्म में:

    • दाएँ तरफ़ (Right-facing) स्वस्तिक सूर्य, समृद्धि और शुभ फल का प्रतीक है।

    • बाएँ तरफ़ (Left-facing) स्वस्तिक तांत्रिक ऊर्जा और माता काली से जुड़ा हुआ है।

  • बौद्ध धर्म में: यह भगवान बुद्ध के चरणचिह्न का प्रतीक है।

  • जैन धर्म में: यह सातवें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ से जुड़ा है।

  • प्राचीन सभ्यताएँ:सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) से लेकर एशिया और अमेरिका की प्राचीन संस्कृतियों तक, स्वस्तिक हमेशा ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक रहा है।


आज भी भारत, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, जापान और चीन जैसे देशों में स्वस्तिक को हर शुभ कार्य – जैसे शादी, गृह प्रवेश और दीवाली – में अनिवार्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। स्वस्तिक शब्द का अर्थ और उत्पत्ति

‘स्वस्तिक’ शब्द संस्कृत के “स्वस्ति” से लिया गया है, जिसका अर्थ है कल्याण, शुभता और मंगलकामना।यह सिर्फ एक चिन्ह नहीं, बल्कि एक ऐसा पवित्र प्रतीक है जिसकी जड़ें पूरी विश्व-इतिहास में फैली हुई हैं।

हिंदू दर्शन के अनुसार:

  • स्वस्तिक का सीधा संबंध भगवान गणेश से है – जिन्हें विघ्नहर्ता और समृद्धि के देवता माना जाता है।

  • यह ॐ (Aum) की दिव्य ध्वनि का दृश्य रूप (visual form) है।

  • इसके चार कोण और भुजाएँ कॉस्मिक एनर्जी की लय को दर्शाती हैं।


Swastik spiritual symbol
Swastik spiritual symbol

स्वस्तिक के 5 गहरे आध्यात्मिक अर्थ

ज्ञान का प्रसार – जैसे भगवान ब्रह्मा के चार मुख से ज्ञान चारों दिशाओं में फैलता है, वैसे ही स्वस्तिक की चार भुजाएँ पवित्र ज्ञान के विस्तार का प्रतीक हैं।

वैदिक ज्ञान – चार भुजाएँ चार वेदों (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद) का प्रतिनिधित्व करती हैं।

पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – जीवन के चार लक्ष्य।

आश्रम व्यवस्था – ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास – जीवन के चार चरण।

सामाजिक संतुलन – चार वर्ण – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र – समाज में संतुलन बनाए रखते हैं।


भगवान नारायण के चरणकमल
भगवान नारायण के चरणकमल

भगवान विष्णु और स्वस्तिक का संबंध

पुराणों में वर्णित है कि भगवान नारायण के चरणकमलों पर 16 दिव्य चिह्न पाए जाते हैं, जिनमें से एक स्वस्तिक भी है।इसीलिए इसे Divine Stamp माना जाता है – जो किसी भी स्थान, वस्तु या व्यक्ति को सीधा भगवान से जोड़ देता है।


पूजा-पाठ और स्वस्तिक का प्रयोग

भारतीय घरों में स्वस्तिक हर पूजा का अभिन्न हिस्सा है।

  • इसे कुमकुम, हल्दी, चंदन या सिंदूर से बनाया जाता है।

  • विशेष रूप से दाएँ हाथ की अनामिका (ring finger) से बनाया जाता है।

  • इसे कलश, दरवाजे और पूजा स्थल पर अंकित किया जाता है।

  • कई बार इसकी भुजाओं के बीच चार बिंदियाँ भी बनाई जाती हैं, जो समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक हैं।


नाजी जर्मनी चिन्ह
नाजी जर्मनी चिन्ह

पश्चिम में गलतफहमी

20वीं शताब्दी में नाजी जर्मनी ने इस पवित्र चिन्ह का दुरुपयोग कर इसे हिंसा और नफ़रत से जोड़ दिया।यही कारण है कि पश्चिमी दुनिया में आज भी इसे अक्सर गलत दृष्टि से देखा जाता है।

लेकिन, भारत की धरती पर स्वस्तिक हमेशा से सकारात्मक ऊर्जा, सूर्य की शक्ति और कल्याण का प्रतीक रहा है।





निष्कर्ष

स्वस्तिक केवल एक चिन्ह नहीं है – यह एक जीवंत कंपन (Living Vibration) है, जो हमें परमात्मा से जोड़ता है और हमारे जीवन को मंगलमय बनाता है।

👉 अगली बार जब आप स्वस्तिक बनाएँ, तो याद रखिए कि यह भगवान की उपस्थिति और आशीर्वाद का प्रतीक है।

स्वस्तिक का असली अर्थ | Spiritual Symbolism of Swastik in Hinduism, Buddhism & Jainism

 
 
 

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